मानस पुन्य पुंज, फ़ैरफ़ेक्स कथा – Manas Punya Punj, Fairfax Katha
27th June 2015 – 5th July 2015

किसी से किसी भी प्रकार की अपेक्षा नहीं रखना पुन्य है । जितने समय हम भगवत भाव में जिये ब्रह्म भाव में जीना पुन्य है ।प्रसन्न चित्त रहना पुन्य है ।
Living without expectation from anyone is punya. Living with devotion to and with thoughts of the scriptures and of God is punya. Being happy and content is punya.

जीवन में सहज और स्वाभाविक जीना पुन्य है ।
गृहणा नफ़रत पाप है । प्रेम पुन्य है ।
Being yourself and being true to yourself in life is itself punya, goodness. Hatred is sinful. Love is punya.

पुन्य माने कोइ परम शुभ, लाभ नहीं ।
जितने समय हम पवित्र हो यह पुन्य है । हम स्वच्छ होते है । पवित्र कितने होते है?
Punya is supreme meritoriousness / auspiciousness, not material gains. Those times that we are pure, this is punya. We may be bodily clean, but how pure are we?

मानस धनुषजग्य, बिहार कथा – Manas Dhanushjagya, Bihar Katha
23rd April 2015 – 31st April 2015

व्यक्ति जैसा भी है जब एक परम तत्व का शरणागत हो जाता है तो उसे कुछ करने को बचता नहीं ।
It is of no significance who the individual is or what he is like - there is nothing left to be done once he surrenders to a Supreme element.

जग्य एक यात्रा है शान्ति रूपी भक्ति प्राप्त करने की । जग्य में तीन विद्या
- कोई भी काम करो जीवन में यग्न भाव से करो ।
- गुरु निष्ठा ।
- अहंकार का भंग ।
Yagna is a journey to achieve bhakti (devotional love), the real peace. There are three ways of doing this:
- any work that you do in life, do it with a sense of offering, of love.
- faith, devotion and belief in your guru.
- letting go of and breaking your ego.

मानस हनुमान चालीसा (भाग 10), गोवा कथा – Manas Hanuman Chalisa (Part 10), Goa Katha
11th April 2015 – 19th April 2015

फ़ूल एकान्त में खिलता है व्यक्ति के अंतःकरण का फ़ूल भी एकान्त में खिलता है । प्रत्येक व्यक्ति को अपना एकान्त संभालना चाहिये ।
A flower blooms in quietude; man's inner self also blossoms in solitude. Each one of us should find our own space and solitude.

प्रसन्न रहने के लिये मौसम की जरुरत नहीं है मन की जरुरत है ।
Our happiness is not dependent on outer circumstances but on our own self, own state of mind.

मानस मधुमास, बनारस कथा – Manas Madhumas, Varanasi Katha
21st March 2015 – 29th March 2015

संसार छुडा दे वो गुरु नहीं । संसार का सार समझा दे वो गुरु ॥
He who teaches us how to renounce and leave the world is not a Guru. He who allows us to understand the tune and frequency of the world - he is the Guru.

जब भीतरी प्रसन्नता शुरु हो जाये तो समझना हमने मधु चख लिया ।
When you sense innate joy permeating from within, know that you have tasted the divine nectar.

बेहोशी दे वो मधुपान नहीं । अपने मौलिक होश में ला दे उसका नाम मधुपान ।
Madhupaan, the taste of Nectar, is not that which disorients us; rather, it awakens us to our true self.

वैराग्य विवेक जन्य हो । परिस्थिति जन्य नहीं ।
Renouncement should be borne of discretion, not out of a situation.

मानस धरम, अहमदाबाद कथा – Manas Dharam, Ahmedabad Katha

अमुख स्थिति का नाम पर्मात्मा है ॥
The Supreme Soul / Element is a state of being.

सत्य बौद्धिक नहीं होना चाहिये । सत्य हार्दिक होना चाहिये ।
Truth should be heartfelt; not just intelligible.

मानस धर्म माने सम्यक धर्म । अतिरेक नहीं ।
Maintain virtues with modesty , don't become superfluous.

मानस मंगल भवन, कच्छ कथा – Manas Mangal Bhavan, Kutch Katha
10h January 2015 – 18th January 2015

हम सुखी होने के लिये दुखी हो रहे है यह अमंगल है ।
हम दूसरों को सुखी करने के लिये दुखी हो वो मंगल है ।
Being sad and miserable in anticipation of our happiness is inauspicious. Being downcast for the sake of others' happiness is propitious.

निष्फ़ल होना गुनाह नहीं । निरुत्साहित होना गुनाह है ॥
Failure is no crime, but being without zeal and enthusiasm is.

राम चरित मानस किताब नहीं हमारे देश के ऋषि का कलेजा है ।
Ram Charit Manas is not merely a book; its the very heart of the sages of this country.

मानस मंगल भवन, कच्छ कथा – Manas Mangal Bhavan, Kutch Katha
10h January 2015 – 18th January 2015

हम सुखी होने के लिये दुखी हो रहे है यह अमंगल है ।
हम दूसरों को सुखी करने के लिये दुखी हो वो मंगल है ।
Being sad and miserable in anticipation of our happiness is inauspicious. Being downcast for the sake of others' happiness is propitious.

निष्फ़ल होना गुनाह नहीं । निरुत्साहित होना गुनाह है ॥
Failure is no crime, but being without zeal and enthusiasm is.

राम चरित मानस किताब नहीं हमारे देश के ऋषि का कलेजा है ।
Ram Charit Manas is not merely a book; its the very heart of the sages of this country.

मानस दशरथ, कोलकता कथा – Manas Dashratha, Kolkata Katha
29th November 2014 – 07th December 2014

सभी प्रकार की अभावता रहे फ़िर भी त्रुप्त रहे उसका नाम फ़कीर ।
Fakir is one who is content and satisfied in the midst of total scarcity.

भगवान सुख स्वरुप है तो उसके अंश होने के कारण हम भी सुख स्वरुप है ।
God is the embodiment of joy; and as a part of Him, we are also naturally beings of happiness.

भक्ति विधी है भजन के महाल में प्रवेश करने के लिये ।
Devotion is a technique, a method to gain entry into the grand palace of Bhajan.

भजन से बडा कोई सारथी नहीं हो सकता ।
भक्ति भजन नहीं है । भक्ति भजन तक पहुंचने का मार्ग है ।
भक्ति एक विधी है एक प्रक्रिया है ।
There is no Charioteer more supreme than Bhajan (singing for God).
Bhakti (Devotion) is not Bhajan. Bhakti is a way to reach Bhajan; it is a process and a procedure.

मानस मीरा(भाग २), मेरता कथा – Manas Meera(Part 2), Merta Katha
25th Ocotber 2014 – 02nd November 2014

मीरा ने जो गाया उसमें क्ऱुष्ण की आवाज थी ।
Krishna's voice is within Mira's singing.

दो काम करना होगा - बहिर स्वच्छता और भीतरी पवित्रता ।
Two things need to be done - outer cleanliness and inner purity

विश्वास ही विश्वनाथ है ।
Faith itself is Vishvanath, the Supreme Element, Lord Shiva.

परमात्मा तक पहुँचने का मतलब है अपने तक पहुँचना ।
To reach the Supreme is to reach our own inner self.

मीरा के प्रेम सरोवर में डूबने के लिये पाँच सीड़ीया छोड़नी प़डेगी -
१. दल की सीड़ी - दल की सीड़ी पार करनी होगी सच्चे अध्यात्मिक होने के लिये ।
२. निज बल की सीड़ी - निज बल से नहीं होगा कृपा बल से होगा ।
३. खालों का संग छोडो - अपने खल को भी छोडो ।
४. शिकायतें छोडो - परनिन्दा भी और नीज निन्दा भी छूटे ।
५. लोक लाज छोडो - लोग क्या कहेंगे ।
To immerse in the lake of Meera's love, we must step down from these five steps -
1. Leave Dal (Sampradaye) - to become truly spiritual and to leave groups
2. Leave one's own efforts - it is Kripa, the power of blessings, that is working.
3. Leave the wicked - including our own wicked tendencies.
4. Leave complaints - criticising others and our own self.
5. Leave the fear of society - what others will say.

मानस दुर्गा, दुर्ग कथा – Manas Durga, Durg Katha
25th September 2014 – 03rd October 2014

जिसको बहुत सुन्दर बोलना हो सफ़ल वक्ता होना हो उसको कालिका की उपासना करनी चाहिये ।
One who wishes to be a successful orator and excellent speaker should worship Goddess Kalika.

भगवत कथा सामूहिक प्रार्थना का एक प्रकार है लेकिन सामूहिक प्रार्थना में प्रदर्शन ना हो ।
Bhagwat Katha is type of group prayer gathering; but it should not become an exhibition or a show.

पाँच निष्ठा से प्रत्येक साधक को गुजरना पडता है -
गुरु निष्ठा । नाम निष्ठा । शास्त्र निष्ठा । शिव निष्ठा । शब्द निष्ठा ।
Five Nishthas, allegiances every sadhak has to pass through:
- Guru nishtha, to one's Guru.
- Naam nishtha, to the name
- Shastra nishtha, to the Scripture
- Shiv nishtha, to the Supreme Element / God.
- Shabad nishtha, towards the word.

मानस कामदर्शन, खजुराहो कथा – Manas Kamdarshan, Khajuraho Katha
13th September 2014 – 21st September 2014

अधिक काम का भोग बमन कर सकता है संम्यक्ता आवश्यक है तुलसी हमें औषधि देते है जिससे पच जाये, जो बमन से बचाये ।
Too much indulgence in desires can cause regurgitation, a vomit. A controlled middle path is must. Tulsidasji shows us a medicine which helps in digestion.

कॄष्ण ब्रह्म है । कॄष्ण ने गीता में कहा है धर्म अविरुद्ध काम मैं हूँ ।
अन्न ब्रह्म है । अन्न ज्यादा खा लो तो बमन हो सकता है ।
काम ब्रह्म है पर अतिरेक बमन करवा देगा ।
Krishna is Brahma, the Supreme. In the Gita, He has declared 'I am the Passions/desires', under the sanctions of religion. Food is Brahma, but over-eating can cause sickness. Desires, too, are part of the Supreme Element yet excessive indulgence can result in regurgitation.

हर जगह संयम आवश्यक है काम खराब नहीं कामी खराब है, लोभ खराब नहीं लोभी खराब है, रिवाल्वर खराब नहीं चलाने वाला खराब है ।
Control and discipline are required everywhere. Passion is not bad but the lustful is condemnable; Desires are not bad but the gluttonous is; Revolver is not bad as such but the one who uses it to kill is.

व्यासपीठ कीचड में पडे हीरे को धोने का काम करती है ।
The Vyaspeeth cleanses those diamonds that have fallen into the mud.

मानस हनुमान चालिसा – भाग ९, पनामा कथा – Manas Hanuman Chalisa – Part 9, Panama Katha
19th July 2014 – 27th July 2014

सत्य कब बोला उसकी चिंता मत करो । जो बोला गया वो सत्य होना चाहिये ।
Don't dwell on when the truth was spoken. What is important is that what has been said is the truth.

संत के लक्षण
१. तंत ना करे वो संत
२. जो अनंत है वो संत
३. जिसको महंत बनने की लालसा ना हो वो संत
४. जिसका कोई अंगत ना हो वो संत
५. जिसकी कोई पंगत नहीं वो संत
The characteristics of a saint:
1. One who does not get into argument or conflict.
2. One who had no end, is beyond the physical.
3. One who has no interest in power or any position.
4. One who has no favourite few.
5. One who has no specific group.

मानस भगवान, रोम कथा – Manas Bhagvan, Rome Katha
28th June 2014 – 2nd July 2014

भक्त को भगवान की जरुरत नहीं है, भगवान को भक्त की जरुरत है ।
A Bhakta does not need Bhagwan; rather. Bhagwan needs the Bhakta.

भगवान दिखता नहीं इस लिये मुल्यवान है ।
It is because God cannot be seen that He is significant.

कभी भी किसी की, किसी से तुलना मत करना ।
जो आदमी अपने होने में संतुष्ट नहीं है वो विश्व में कहीं संतोष नहीं पा सकता ।
Never ever compare anyone with anybody. One who is not satisfied with his own self can not find satisfaction anywhere in the world.

चेतना जिस दिशा में झुके, झुका देनी चाहिये ।
Let the consciousness flow / bent where ever it naturally does.

मानस सरजु, कर्नलगंज कथा – Manas Saraju, Kernalganj Katha
24th May 2014 – 1st June 2014

कर्म के दायरे में विधि निषेध होते है । पर भक्ति के दायरे में प्रेम में कोई विधि निषेध नहीं होता ।
Rules and prohibitions exist in the field of karma, but in the sphere of devotion and love, there are no regulations.

धर्म के धारण का अर्थ है कि व्यक्ति धैर्यवान हो ।
Taking on dharma means becoming dhairywan, learning the art of patience and forbearance.

सुंदरता बाहर की व्याख्या पर निर्भर नहीं होती । सुंदरता भीतर की अवस्था पर निर्भर होती है ।
Beauty does not depend on external details; Beauty reflects the inner disposition, the internal state of one's being.

अपने गुरु कृपा से पाई हृदय की द्रष्टि से शास्त्र दर्शन हो ।
Read and engage with the spiritual texts using the innermost vision you have gained from the blessings of your Guru.

इन आँखो से प़ढा जाता है इन आँखो से पाया नहीं जाता । जब हृदय की आँखो से शास्त्र का दर्शन होने लगे तब बुद्धि निर्मल होती है ।
With our eyes we can see and read, not realise or attain. It is when we read the scriptures with our heart, our innermost eyes, that our intellect becomes pure.

मानस बोधगया, बोधगया कथा – Manas Bodhgaya, Bodhgaya Katha
19st April 2014 – 27th April 2014

पूरी दुनियाँ को कोई प्रसन्न नहीं कर सकता । खुद को प्रसन्न रखना और रहना सीखो । कोई भी घटना घटे जीवन में प्रसन्न ही रहो । प्रसन्न रहने की कुंजी । आग्रह मुक्त चित्त शिकायत मुक्त चित्त पवित्र चित्त ।
Nobody can make the whole world happy. Learn to keep your own self happy and remain happy under all circumstances in life. The key to being happy is a non-insisting mind, non-complaining mind, and a pure mind.

अपने विवेक का ध्यान रखे । विवेक मिलता है केवल बुद्ध पुरुष के संग से ।
Let us take care of our Vivek (power of discretion); Vivek (wisdom) is obtained only through the company of saints and enlightened masters.

मानस मीरा, चित्तोडगढ कथा – Manas Meera, Chittorgarh Katha
31st March 2014 – 08th April 2014

अपने विवेक का ध्यान रखे । विवेक मिलता है केवल बुद्ध पुरुष के संग से ।
Let us take care of our Vivek (power of discretion); Vivek (wisdom) is obtained only through the company of saints and enlightened masters.

धर्म आदमी के जन्म को सुधार देता है । अध्यात्म आदमी की मृत्यु को सुधार देता है । नीतिशास्त्र जीवन को सुधारता है । भक्ति जन्म को भी सुधारती है मृत्यु को भी सुधारती है और अनिष्टों से भी मुक्त करती है ।
Righteousness/ Having a faith improves a man's birth; Spirituality improves a man's death; Ethical philosophy improves his life. Devotion improves all the three- his life, his death and liberates him from all evils.

मीरा भक्ति का आठवाँ अवतार है । मीरा के पास ज्ञान का दीपक भी है भक्ति का मणि भी है वैराग्य की विभूती भी है ।
Meera is the eighth incarnation of devotion. Meera is endowed with the lamp of wisdom, the jewel of devotion and is abound with renunciation.

मानस गंगासती, सामढियाला कथा – Manas Gangasati, Samadhiyala Katha
8th March 2014 – 16th March 2014

गंगा सिर्फ़ नदी ही नहीं है । वो हमारी भारतीय संस्कृति सभ्यता का प्रतीक है ।
Ganga is not merely a river; Ganga is a symbol of our culture and civilisation.

प्रति क्रिया मत करो । प्रति भाव दो ।
Never react back; rather, give your suggestion and idea.

भक्ति ऐसा तत्व है की जो भजन करे उसको तुरिया अवस्था की उपलब्धी के लिये कोई योग नहीं करना पडता ।
To reach the fourth stage of consciousness, a devotee does not need to do any such yog. Such is the potency of devotion.

जीव जब जाता है तो उसके साथ उसका भजन जाता है । भय से कुभय से कोई भी तरीके से भजन लो ।
When a being departs, his bhajan goes along with him; out of fear or for any reason, do bhajan (prayers).

तुम्हारा लक्ष्य अगर बडा हो और उस पे हंसने वाले न हो तो समझना लक्ष्य अभी छोटा है ।
If you are aiming for the highest and none are laughing at you, know that your goal is not high enough.

हमारे पास पैसे कम हो जाये कोइ बात नहीं मगर भक्ति मार्ग में हमारे आँसु अगर कम हो जाये तो समझना हम गरीब हो गये ।
With less money, we can manage; but in the path of devotion, if we can no longer cry, understand that we have lost something, that we have become poor.

मानस महर्षि, तमिलनाडु कथा – Manas Maharshi, Tamilnadu Katha
1st February 2014 – 9th February 2014

भजनानंद को चाहिए वो भीड में भी अपना एकान्त चुन ले ।
A bhakta finds and relishes in his own solitude even within a crowd.

उपदेश सकोप ना दिया जाये । बोलने वाला सकोप ना बोले । सुनने वाला श्रद्धा से सुने ।
Instructions and commands should not be given with wrath. The speaker should not be in a rage and the listener should listen with faith.

समझ ही मुक्ति का दाता है ।
Understanding itself gives salvation.

ये कथा धर्म सम्मेलन नहीं है । यह जीवन सम्मेलन है ।
Katha is not a religious meeting; it is a discussion about life.

अवस्था का नाम है अध्यात्म । एक स्थिती जो हिन्दु या मुसलमान नहीं हो सकती ।
Spirituality is a state of being; one which is neither Hindu nor Muslim.

बुद्ध पुरुष हमें सामग्री देता है । यात्रा खुदको करनी होती है ।
Self-realised people provide us with the tools; the journey needs to be undertaken by us.

कर्म जड है, कर्म का फ़ल परमात्मा के विधान से आता है । कबूल करो जो होता है ईश्वर विधान से होता है ।
Karma (action) is inert and lifeless. The fruit of our actions comes through God's legislation. Let us accept the fact that whatever happens, it happens through His laws.

मानस मरम, मुंबई कथा – Manas Maram, Mumbai Katha
11th January 2014 – 19th January 2014

पदार्थो से सुविधा मिलती है सुख नहीं । रुपयों से सुविधा मिलती है लेकिन सुख कुछ न हो तो भी हो सकता है । अपने आत्मसुख का कारण उपकरण और साधन मत समझों ।
Material things can give comfort and conveniences but not happiness. Money can buy comfort but we can also be happy without having anything. Do not take the reason for your inner happiness and joy to be material objects.

प्रभु रस रुप है । धर्म जगत जब युवानी को रसहीन करने का बुद्धिपूर्वक प्रयास करता है तब धर्म को ग्लानी होती है ।
God is an embodiment of energy and enjoyment. It is a shame when religion tries to intelligently prevent children and youth from truly enjoying life.

राम रस है प्रेम रस है तुलसी को पूछो तो ध्यान भी रस है । कथा भी रस है वक्तव्य भी रस है श्रोतव्य भी रस है ।
Ram is ras - enjoyment/energy; love is also an enjoyment; and for Tulsidasji, even meditation is enjoyment. Katha is ras; the spoken and the listening are both ras.

कारण के बिना कार्य नहीं होता ।
There cannot be action without cause or reason.

भगवान सभी रस का धारक है और सभी रस से पर भी है । प्रभु रसिक है और परमात्मा के अंश के नाते हम भी रसिक हो तो ये आलोचना का विषय नहीं बनना चाहिये ।
God takes on all aesthetic enjoyments but is still beyond and above these enjoyments. God takes interest and being a part of the supreme being, our enjoyments should not be criticised.

कर्म से मुक्त होना मुश्किल है ।
It is difficult to liberate yourself from the consequences of your actions.

सुख की सीमा जरुरी है ।
It's necessary to have a limit even for happiness.

विद्या में स्पर्धा अपराध है ।
In knowledge, having competition is a sin.

सदगुरु हम में रही चेतना को विकसित करता है ।
Sadguru inspires and brings out our hidden and latent consciousness.

जीव का मरम सत्य है । जीवन का मरम प्रेम है । जगत का मरम करुणा है ।
The cause/ purpose of the soul is truth; the purpose of our life is love; and the purpose of this universe is compassion.

हमें हमारे स्वभाव का मरम जानना चाहिए । हरि नाम से सब मरम समझ में आता है ।
We should learn to understand the point and purpose of our own character. Taking God's name helps us to understand all the reasons and purposes.

मानस गुरु पद रज, आदिपुर कथा – Manas Guru Pad Raj, Adipur Katha
28th December 2013 – 5th January 2014

गुरु की चरण रज आश्रित के मन रुपी दर्पण को साफ़ करती है ।
The dust from the Gruru's feet cleanses the mirror of heart, the mind of the aashrit (sheltered).

तुलसीदास जी कहते है कि निज सुख के बिना मन कभी स्थिर नहीं होगा ।
Tulsidasji has said that without being happy within, we can never be stable and satisfied.

गुरु की रज को जो सिर पर लगाए तो ७ प्रकार के ऎश्वर्य उसके घर चक्कर मारते है ।
संसारिक ऎश्वर्य - लोकेश्ना । सुतेशना । वितेशना । अध्यात्मिक वैराग्य का ऎश्वर्य । भजन का ऎश्वर्य । ज्ञान का ऎश्वर्य । विवेक का ऎश्वर्य.
The dust of Guru's raj over our head leads to seven types of ayshvarya: prosperity to surround us: the worldly prosperities of lokeshana (power), suteshana (offspring), viteshana (wealth); spiritual prosperities of vairagya (detachment), bhajan (singing praises of God), gyaan (knowledge), vivek (wisdom).

हम पाँच तत्वो से बने है इन से सीखे
आकाश - हम अविभक्त रहे संकिर्ण न हो ।
पृथ्वी - सब को धारण करे ।
जल - हम सरिता की तरह बहे ।
अग्नि - अनाव्श्यक का भस्म करे ।
वायु - सब का जीवन बने पर दिखे ना ।
Let us learn from the five elements of which we are made:
Space, Ether - let us remain undivided and not become narrow
Earth - let us help and share the burden of all
Water - let us flow like water
Fire - let us eliminate the unnecessary and unimportant
Air - let us silently become the lifeline for all.

भाव और अर्थ अमूर्त है । उसको भाषा के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है ।
Emotions and their meaning are without form; they are made visible through the medium of language.

ईश्वर समर्थ है । ईश्वर से भी समर्थ ईश्वर का नाम है ।
God is able; yet even more powerful and capable is His Name.

मानस लोह पुरुष, बारडोली कथा – Manas Loh Purush, Bardoli Katha
7th – 15th December 2013

हरि का नाम वल्लभ है । नाम को तुलसी ने वल्लभ कहा है ।
The name of God is Vallabh; Tulsi has said His name is Vallabh, the iron element.

हमारे अंदर के लोह तत्व को मजबूत रखने के लिये तीन चीजें : ब्रह्मचर्य(संयम), तप, श्रम ।
To strengthen the iron element within us we require these three: Brahmacharya (control), Tap (penance), Shram (hard work).

किस योग से हम योगेश्वर अनुभव कर सकते है
१. समता - हम समता सीख जाये
२. कार्य कुशलता - अपने कार्य क्षेत्र में कुशल बने ।
The Yog which can help us to experience God is:
1. Let us learn to be equal
2. To be an expert in our work field.

मानस अंबिका, अंबाजी कथा – Manas Ambika, Ambaji Katha
5th – 13th October 2013

यह जगत बंधन नहीं । यदी जीना आता हो तो यह जगत जीवन्त मोक्ष है ।
This world is not a bondage; Life can be a living salvation if we know how to live.

प्रत्येक मंदिर बाहर से स्वच्छ होना चाहिये और भीतर से पवित्र होना चाहिये । प्रत्येक व्यक्ति भी बाहर से स्वच्छ और भीतर से पवित्र होना चाहिये । फ़िर कोई लम्बी साधना करने की जरुरत नहीं ।
Every temple should be clean from the outside and pure inside. Likewise, if each individual is clean externally and pure within, then there is no need for long and strenuous discipline (sadhana).

माँ त्रिस्तरीय का काम करती है । सृष्टि को उत्पन्न करती है उसका परिपालन और उसका संघार करती है ।
Maa (the universal mother) works on three levels: she creates the universe, nurtures it and also destroys it.

अम्बा के तीन स्तर है स्त्री शारीर अम्बा का ही अंश है । एसा मान कर उसका तीन स्तर पर सम्मान करना चाहिये । कन्या का सम्मान धर्म पत्नी का सम्मान और माँ का सम्मान ।
Ma Amba is present at three levels and all women are an ansha (part) of Amba/ divine mother. Keeping this in mind, we should respect a woman on three levels: as a daughter, as a wife and as a mother.

उमा एक निष्ठा से जन्म है । अम्बा श्रद्धा का रुप है । भवानी यह जग जननी है ।
Uma is born out of devotion towards One; Amba embodies the physical form of faith; Bhavani is the Universal mother.

मानस हनुमान चालीसा (भाग ८), सिक्किम कथा – Manas Hanuman Chalisa (Part 8), Sikkim Katha
14th – 22nd September 2013

पैसे को फ़ल मत बनाना, ये डायवर्झन है ।
Don't make money the ultimate fruit and desire; understand that this is a diversion.

आनंद की अंतिम सीमा आसूँ है ।
The final step of joy and bliss is tears.

हम सब का जीवन फ़ल होना चाहिये प्रेम । सत्य शायद हम चूक जाये । करुणा छूट जाये । लेकिन प्रेम बना रहे । यह जीवन फ़ल है ।
Love should be the fruit and result of our lives. We may slip in being truthful and may also let go of compassion, but love ought to remain.

जागृत रहना हो जिसको उसे अतीत का ज्यादा ध्यान नहीं करना चाहिये और भविष्य की ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिये.
He who wants remain enlightened should not dwell on the past or worry about the future.

निजता में जीयो । आप दूसरों की तरह होने में अपने marks कम करते हो ।
Be original, be yourself. In trying to become like someone else, you are reducing your own marks.

निरंतर अपने आप से स्पर्धा कर के आगे बढो । दूसरो से नहीं ।
Stride ahead and progress competing with your own self, not with others.

अपने आप को कभी सब से काबिल नहीं समझो ।
Never think yourself to be the most capable of all.

इश्वर ने दिया है एसा सोच कर कष्ट सह लेना तप है ।
To bear pain as it is given to us from God is itself tap (penance).

मनोरथ माने इच्छा नहीं चाह नहीं । वो एक प्रार्थना है ।
मनोरथ माने पाच वस्तु । दर्शन मनोरथ शब्द मनोरथ स्पर्श मनोरथ रस मनोरथ गन्ध मनोरथ ।
Manorath does not mean desire or want; it is a a prayer.
Manorath includes these five: darshan manorath (to see), shabda manorath (to hear the words), sparsha manorath (to touch), rasa manorath (to feel the essence) and gandha manorath (to smell).

मनोरथ माने इच्छा नहीं चाह नहीं । वो एक प्रार्थना है ।
मनोरथ माने पाच वस्तु । दर्शन मनोरथ शब्द मनोरथ स्पर्श मनोरथ रस मनोरथ गन्ध मनोरथ ।
Manorath does not mean desire or want; it is a a prayer.
Manorath includes these five: darshan manorath (to see), shabda manorath (to hear the words), sparsha manorath (to touch), rasa manorath (to feel the essence) and gandha manorath (to smell).

राम कथा रस भरा वेदांत है ।
Ram Katha is a Vedanta filled with juice and nectar.

पुरुषार्थ के पात्र में ही कृपा निवास करती है ।
It is only within our efforts that kripa (blessings) takes its place and resides.

किसी के प्रती हम प्रमाण पत्र ना दे । ईश्वर ने हमें यह अधिकार नहीं दिया है ।
God has not given us the right to pass judgements on others.

यह कान एक यंत्र है । सुनना श्रवण नहीं है । श्रवण एक विज्ञान है । यह भक्ति है ।
Our ears are a device; to hear is not listening. Listening is a science; it is devotion.

मानस संवाद, इंदोर कथा – Manas Samvaad, Indore Katha
3rd – 11th August 2013

संवाद गुरु की पादुका से भी हुआ करता है ।
Its possible to have a dialogue with Guru's padukas (sandals).

अध्यात्म जगत में गुरु का शरीर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है, अपने गुरु के विचारो को स्मृति में रख कर उनसे संवाद करे ।
In spirituality, its not necessary for the Guru to be present physically, one needs to contemplate on His ideas / thoughts and start a dialogue.

प्रलोभन और भय बुद्धी को भटकाते है ।
Temptations and fear lead the buddhi (intellect) astray.

संवाद से धीरे धीरे अपने विकारो से विजय मिलती है ।
A samvaad (dialogue) helps us in getting rid of our shortcomings and defects.

मन से विरोध ना हो । मन से प्रबोध हो ।
Instead of resistance and confrontation, try to have an understanding with your heart/mind.

संवाद से कोई न कोई कथा प्रगट होती है । विवाद से किसी ना किसी प्रकार की व्यथा प्रगट होती है । दुर्वाद से हमेशा क्रोध प्रगट होता है । अपवाद से द्वेष में वृद्धि होती है ।
A samvad (dialogue) gives rise to katha; vivad (argument) gives birth to suffering; durvad (bad language) will always give rise to anger; apvad (false accusation) will give rise to ill-will and enmity.

अध्यात्म जगत में गुरु का शरीर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है । अपने गुरु के विचारो को स्मृति में रख कर उनसे संवाद करे ।
In the spiritual realm, it is not necessary for the Guru to be present physically; keeping his ideas and thoughts in mind, start a dialogue.

यह जिन्दगी तीन पन्ने की किताब है ।
पहेला पन्ना हमें मनुष्य जीवन किसी की करुणा से मिला है ।
तीसरा पन्ना मृत्यु ध्रुव है सत्य है ।
दूसरा पन्ना इस बीच वाले पन्ने में प्रेम घूटो ।
Life is a book which has three pages:
The first page is that we have this human life through someone's compassion and blessing.
The third is to know that death is certain and is true.
And in between these, we need to fill the middle page of our life with love.

अध्यात्म जगत में साँस से नहीं जीया जाता विश्वास से जीया जाता है ।
In the spiritual realm, one does not live and survive on breath; one lives with faith.

मानस अंगद, बेकर्सफ़िल्ड कथा – Manas Angad, Bakersfield Katha
29th June – 7th July 2013

दास के चार लक्षण
१. दास उदास नहीं रहता क्योंकी उसे कोई चिन्ता नहीं होती ।
२. दास दूसरे से कभी आशा नहीं करेगा । करे तो अपने मालिक से ।
३. सम्यक बुद्धि ।
४. गुरु की अहेतु अन्हद करुणा का अहंकार ना हो ।
The four characteristics of a true devotee (servant of God) are:
1. He is never depressed as he has no worries.
2. He does not expect anything from anyone; if he does, then only from his Guru or Lord.
3. He is level headed and steady of mind.
4. He is not arrogant about the unconditional compassion which the Guru showers.

जो आडंबर और अहंकार से मुक्त वो अध्यात्मिक व्यक्ति है ।
One who is free of hypocrisy and arrogance is truly spiritual.

कान अंग है । कान दो यह अंग दान है । कथा को कान रुपी अंग दान करे फ़िर एक शिव संकल्प होना जरुरी है कि अब यह कान शुभ के सिवा कुछ नहीं सुनेंगे । किसी की इर्शा निंदा नहीं सुनेंगे ।
The ear is a limb and we can give and offer our ears to the divine katha, and when doing this, let us think of Shiva and pledge that our ears will listen to nothing but good things; they will not hear of jealousy and hatred of others.

हम पूरा अंग पूरा शरीर किसी के चरणों में समर्पित ना कर पाए तो स्वभाव और निजता के अनुसार कोई ना कोई अंग हरि को समर्पण करे ।
If we are not able to surrender our entire body and life, then at least we can give a part, a limb, to God according to our individual nature.

अंगद के दो अर्थ । एक अर्थ पूरा शरीर । दूसरा अर्थ शरीर के बिलग बिलग भाग को भी अंगद कहते है ।
The word Angad has two meanings. One is the whole and complete body; and the second meaning is any particular part of the body that can also be referred to as Angad.

मानस मोक्ष, हैदराबाद कथा – Manas Moksha, Hyderabad Katha
10th – 18th June 2013

हरि नाम साधु संग और स्वयं राम चरित मानस । कुछ बिमारियो से मुक्त हो कर मोक्ष पाने का उपाय है ।
The name of God, the company of Sadhus and the Ram Charit Manas itself; these are ways to liberate oneself of vices and attain moksha (salvation).

मोक्ष कोई भूमि नहीं है एक भूमिका है । इसका तालुक मन से है एक मन से जुडी स्थिति है ।
Moksha is not a place; it is a state of being. It is connected with your mind, with the way that you think and perceive.

पाँच वस्तु की मात्रा कम होने लगे तो समझना मोक्ष आ रहा है ।
वस्तु - बहुत सी वस्तुओ से आसक्ति कम होने लगे ।
वसु - धन संग्रह की वृति कम होने लगे ।
विषय - विषयो के प्रति धीरे धीरे उदासीनता आये ।
व्यक्ति - एकान्त में सुख मिलने लगे ।
विचार - विचार कम होने लगे ।
When the following five start reducing, know that moksha liberation is drawing close:
Vastu (things) - when you start getting detached from things
Vasu (money) - when the tendency to accumulate money reduces
Vishaya (desires) - when you feel disinterested towards various desires
Vyakti (people) - when you start enjoying solitude
Vichar (thoughts) - when you start thinking less

मोक्ष मन की स्थिति है और मन को बोध होगा भागवत कथा से । और जब मन को बोध होगा तब कोई भी घटना विचलित नहीं करेगी ।
Moksha is a state of mind and this state, this understanding is reached through bhagwat katha (listening to the stories of God). When one reaches this state, then nothing can disturb the equanimity of the mind.

तुम ने पाया है तो तुम अपने सदभाग को बाटो । तुम्हारे सुख में सब का भाग है ।
When you have achieved, distribute and share your good fortune with others; everyone has a part to share in your happiness.

भगवत भक्ति के बिना मोक्ष सुख टिकता नहीं ।
The joy of attaining moksh (salvation) will not last without the love for God.

मोक्ष दो अक्षर का शब्द । मो का अर्थ मोह और क्ष का अर्थ क्षय नाश हो जाना । हमारे जीवन में धीरे धीरे मोह का नाश हो जाये कम हो जाये । उसी को मोक्ष कहते है ।
Moksh (Salvation) is a two letter word - moh means attachment and kshay means destroy. When attachments in our lives start reducing and are finally demolished, that is called moksh.

मोक्ष के लिये मरने की जरुरत नहीं, बहुत सावधानी से जीने की जरुरत है ।
You don't have to die to attain moksh / salvation, you need to live life with full and complete awareness.

मानस मारग, मुंबई कथा – Manas Marag, Mumbai Katha
4th – 12th May 2013

अभय मिलता है सत्य से और गुरु की कृपा से ।
Fearlessness is achieved through truth or through Guru's grace.

हमारे मार्ग में सबसे बडा खतरा है दूसरों को अपने वश में करने की आशा प्रेम के नाम पर ।
Trying to control the other person in the name of love is the biggest danger on our path.

प्रत्येक आदमी को स्वतंत्रता देनी चाहिए की किस मार्ग पर चलना है ।
Each should be given the right to choose his or her own maarag (path).

रामचरितमानस में स्वयं राम एक मार्ग के लिये बोले है की तुम इस मार्ग पर चलो । वो है भक्ति मार्ग, प्रेम मार्ग अथवा तो शरणागति का मार्ग ।
In the Ramcharit Manas, Ram himself has spoken about a path which we should choose; the path of devotion, the path love, also called surrender.

धर्म को समझना है तो छोटे छोटे पंथो से मुक्त होना पडेगा और परम को समझने के लिये धर्म छोडना पडेगा ।
To understand dharma (religion), we'll have to be free from all the small panths (sects); and to understand the Supreme element, we'll have to leave dharma.

विश्व में जो व्यापक है वो ही जीता है । जो छोटा संकीर्ण होता है वो मरता है ।
In this world, what is vast lives; that which is small and narrow dies.

मानस राम जनम, भावनगर कथा – Manas Ram Janam, Bhavnagar Katha
11th – 19th April 2013

जो पाँच वस्तु को संभाले वो शिव को पा सकता है ।
जिसके पास सुर है । जिसके पास शब्द है । जिसके पास ताल है । जिसके पास लय है । जिसके पास नर्तन है ।
One who has / takes care of these five can achieve Shiva: who has a sense of sound and melody; who has words; who has rhythm; who has melody and finally, one who has dance.

इच्छा प्रबल बने तो उससे लोभ जन्मता है । सुन्दरता देखो तो काम जन्मता है । कडवे वाक्य से क्रोध जन्मता है । पर अहंकार कभी भी कैसे भी प्रगट हो सकता है ।
When our desires increase greed is born; seeing beauty, desire is born; from bitter words we experience anger; yet the ego can appear at any point and for any reason.

कोई भी विद्या कोई भी कला इंसान को बु़ढा नहीं होने देती । उसे सदेव जवान रखती है ।
Any form of knowledge and art does not let a man grow old; it keeps him ever young.

भरोसा रख के काम करते जाओ । यह भजन है ।
Do your work with faith; this is your bhajan (prayer).

मुख चढा कर कभी माला नहीं करना । यह माला का अपमान है ।
Never do your mala (rosary) with irritation; this is an insult to the mala.

मकान दीवारों से बने पर घर दिल से बनता है ।
A house is made of walls and a home is built with the heart.

राम कथा तीन वस्तु करती है । यह नया संदेश ले कर आती है । यह देशकाल के अनुसार उपदेश ले कर आती है । यह आदेश भी देती है ।
Ram katha does three things: It comes bearing a new message, gives advice according to the need of the time, and also gives direction.

श्रेष्ठो की भाषा अच्छी होनी चाहीये ।
The language used by the superiors should be good and appropriate.

हनुमंत तत्व आलसी नहीं बनाता ये पुरुषार्थ सिखाता है ।
Hanumant essence does not make us complacent; rather, it teaches us true effort.

सबसे अभय होना हो तो किसी का भय रखना ।
To become absolutely fearless, be fearful of one person.

बच्चों को अपने कुल की पावन मीठी परम्परा का स्मरण कराओ ।
Give your children an awareness of the sacred traditions of your family.

भगवान का जन्म आसू से होता है ।
Tears give birth to God.

मानस राम जनम, भावनगर कथा – Manas Ram Janam, Bhavnagar Katha
11th – 19th April 2013

संत चरित्र और भगवंत चरित्र का इतिहास नहीं इनका अध्यात्म पक़डो ।
Hold onto the spiritual teachings of Gods and Saints; not their history.

कपट छोड के कथा सुनो तो तुमने नौ दिन गंगा में स्नान किया ।
Listening to katha without any deception is like bathing in the Ganga for nine days.

सत्य लिया जाता है प्रेम दीया जाता है और करुणा में जीया जाता है ।
Truth is there to be taken, love is there to be given and life should be lived with compassion.

तुम जो सुनो उसका असर थोडा थोडा होता है । तुम जो देखो तुम जो प़ढो जो साहित्य प़ढो उसका असर होता है ।
What you hear can have some impact on you; what you see and the kind of book you read can also influence you.

कथा सी़डी है । गोस्वामी जी ने सात सोपान माने सी़डी की बात की । सी़डी दो काम करती है । इससे हम ऊपर च़ढ सकते है । सभी महापुरुष नीचे उतारे ।
Katha represents a staircase. Goswami Tulsidasji speaks of seven steps. A staircase can be used to climb and to go down. All great souls have come down (for the benefit of humanity).

मानस हरि मंदिर, पोरबंदर कथा – Manas Hari Mandir, Porbandar Katha
16th – 24th February 2013

गुरु कृपा से अहंकार टूटता है ।
Guru kripa can break the ego.

विश्वास रुपी शिव के तीन नेत्र है, दाई आख सत्य, बाई आख करुणा और बीच की आख प्रेम ।
Shiva, the embodiment of faith, has three eyes; the right eye stands for truth, the left for compassion and the middle represents love.

भक्ति करनी है तो तुम्हारा विश्वास आवश्यक है ।
Faith is most essential in bhakti.

रामचरित मानस हरि मंदिर है. हमारे तीर्थो के मंदिर स्थिर है. शास्त्र एक जंगम हरि मंदिर है जो साथ साथ चलता है ।
Ramcharit Manas is Hari mandir (temple). Our pilgrim places are stationary. Shastra (scripture) is a movable temple which travels along with us.

हनुमान माने सेवा । सेवा करने वाला ही सच्चा पुजारी है ।
Hanuman means service; a true pujari (worshipper) is one who does service.

मंदिर में भगवान की मूर्ति मुस्कुराती हुई होनी चाहिये और दर्शनार्थी रोता हुआ होना चाहिये ।
God's statue in the temple should be smiling and the onlookers weeping.

अपना जीवन ही एक मंदिर है ।
Our life itself is a temple.

मंदिर में दो चीजे बहुत जरुरी है बाहरी स्वच्छता और भीतरी पवित्रता ।
Two essential elements in a temple are outer cleanliness and inner purity.

मानस तीरथराज, अलाहाबाद(कुंभ) कथा – Manas Tirathraj, Allahabad(Kumbh) Katha
19th – 27th January 2013

सदगुरु की आंख में बहती प्रेम धारा (गंगा) है । सदगुरु का लोक मंगल के लिये इधर उधर जाना उसको कर्म की धारा समझना (यमुना) । और वो चुप बैठा हो कुछ बोले ना कभी कभी अपनी मस्ती में मुस्करा दे तो समझना अंदर से ब्रह्म विध्या (सरस्वती) उम़ड रही है ।
The love flowing through Sadguru's eyes is Ganga (prem dhara). His travels for the benefit of the masses is Yamuna (karma dhara). When He is sitting quietly, smiling at times, know that Saraswati (brahma vidya) is flowing forth.

अपना सदगुरु हम जिसकी शरण में प्रसन्न रह सकते है, जिसकी शरण में हमें प्रकाश मिलता है, जिसकी शरण में रहने से हमारी स्वतंत्रता बनी रहे, जो सब के प्रभाव से खुद के प्रभाव से भी मुक्त करके हमें अपने स्वभाव में प्रतिष्ठित करता है एसा सदगुरु तीरथराज है ।
Our Sadguru, who gives us joy, who gives us light (spiritual awareness), who keeps our individuality intact, who keeps us free from all influences including his own and establishes us in our own innate nature / disposition, such a Sadguru is Tirathraj; king among all pilgrimages.

मानस में तो लिखा है कि गंगा नदी थो़डी है । गंगा तो हमारे जीवन का हमारी पूर्वी पूर्ण अध्यात्मिकता का अक्षूर्ण और अखंड प्रवाह है ।
It is written in the Manas that Ganga is not just a river; Ganga represents the unbroken and indivisible flow of our life and that of the entire eastern spirituality.

जीवन में सत्य हो और समर्पण हो तो घटना घट जाती है ।
With satya (truth) and samarpan (surrender) in life, the incident occurs.

विचारों का दान श्रेष्ठ दान है ।
The sharing of thoughts and ideas is the ultimate form of giving.

यह मानस मेरा गुलदस्ता है । इसमे सब फूल रखता हू । बीच में तुलसी का पौधा रखता हू ।
Manas is my flower pot; inside, I keep all kinds of flowers and at the centre is the Tulsi plant.

आदर सब को दो । आत्मा किसी एक को दो ।
Give respect to all; give your atma (soul) to one.

संत समाज के तीरथराज में प्रसन्न मन से स्नान करने जाये सुनो और समझो । फिर अनुराग के साथ उसमे डूबो तो चारो फल शारीर होते हुए प्राप्त कर लोगे ।
With a content mind, bathe in the Tirathraj of Sant Samaj; listen and contemplate. Immerse yourself with devotion and the four aims of life (dharma, artha, karma, moksha) are achieved in this very body.

जो जागृत होता है उसका स्मरण वो करता है ।
God remembers those who are awakened and alert.

यह तीरथराज है । यह तीर्थो का सम्राट है ।
This is Tirathraj (Prayag), king amongst all pilgrimages.

मानस सिव, बैद्यनाथ कथा – Manas Siv, Baidyanath Katha
29th December 2012 – 06th January 2013

मानस स्वयं शिव है ।
Manas itself is Shiva.

गुरु और वेदांत वाक्यो में विश्वास करना ही श्रद्धा है ।
Trust in the words of one's Guru and the Vedanta is itself faith.

श्रद्धा का स्थान हो आदमी का ह्रदय ।
The heart is where faith should reside.

पार्वती माने श्रद्धा । हमारे ह्रदय में होनी चाहिये । बोधिक श्रद्धा नहीं हार्दिक श्रद्धा हो ।
Parvati represents faith. Our heart should be filled with faith - faith of the heart, not of the mind.

आनंद खोजिये । या तो खुद खोजिये या गुरु पे छो़ड दीजीये ।
Find joy and bliss; either do it yourself or let your Guru do it for you.

रामचरित मानस के हर सौपान में शिव की महिमा उजागर हुई है ।
The importance of Shiva is displayed in each saupan of the Ramcharitmanasa.

विश्राम पाना है तो शंकर का नाम लो ।
Take the name of Shankara if you want rest and repose.

शिव विश्व की औषधि है । वैद्यनाथ वैद्यो का नाथ है । हमारा सब इलाज करने वाला देवता है ।
Shiva is the remedy of the world. Vaidyanath is the master of all doctors. He is the God that can cure each one of us.

शिव स्वयं सदगुरु है । सदगुरु स्वयं शिव है ।
Shiva himself is Sadguru and Sadguru himself is Shiva.

मानस केन्सर, अहमदाबाद कथा – Manas Cancer, Ahmedabad Katha
08th – 16th December 2012

आठ प्रकार की अहंकार की ग्रंथि :-
- बल का अहंकार
- रुप का अहंकार
- विद्या का अहंकार
- धन का अहंकार
- प्रतिष्ठा का अहंकार
- कुल का अहंकार
- त्याग का अहंकार
- वर्ण का अहंकार
Eight types of knots of the Ego:
- ego of power
- ego of beauty
- ego of knowledge
- ego of money
- ego of fame
- ego of family, descent
- ego of renunciation
- ego of caste and colour

हम खुद की खोज करे, दूसरों की सेवा करे और कोई परम तत्व से प्रेम करे ।
Let us try to find ourselves, be in service to others and love whomsoever we take to be the Supreme Being.

अहंकार का नाश केवल हरि कृपा से ही होता है ।
It is only with God's blessing that the ego can be killed.

प्रसन्नता भी रोग का एक इलाज है । प्रसन्नता भी एक औषधि है ।
Happiness is one remedy for mental illness, and is also a cure.

तुम प्रसन्न रहो तो भी मनोंरोग कम हो जाये ।
Mental diseases can decrease by the simple act of being satisfied and happy.

अहंकार को अपने बारे में सुनने की बहुत इच्छा होती है ।
The ego loves to hear about itself and loves to be spoken about.

सेवा ना हो कोई चिंता नहीं । मानसिक रुप से किसी बुद्ध पुरुष के निकट जीयो ।
Let us not worry if we cannot do seva or service. Let us through our minds be living close to an enlightened being.

कई वैद्य है । तुलसी ने एक समर्थ वैद्य बताया है और वो है सदगुरु ।
There are many doctors; Tulsidasji has revealed the most capable and that is the Sadguru.

सच्चा श्रवण कानों से नहीं आखों से होता है ।
True listening happens through the eyes, not the ears.

तुलसीदासजी ने अहंकार को Cancer कहा है ।
Tuslsidasji has said ego is Cancer.

अहंकार Cancer अति दुखद । अत्यंत पीड़ा दाई है ।
The cancer of ego is most sorrowful and gives much pain.

मानस सुर धेनू, गोवर्धन कथा – Manas Sur Dhenu, Govardhan Katha
17th – 25th November 2012

गो हमारी इंद्रिय है उसे संभाले ।
Gau (cow) signifies our sense organs; we must take care of it.

गो माता की हत्या ना हो वेदों ने सबसे पहेले यह घोषणा की ।
The Vedas were the first to speak against the killing of cows.

गो माता बुद्ध का प्रतीक है ।
The Mother Cow symbolises Buddha.

माँ जन्म देती है, गो माता जीवन देती है ।
A mother gives birth; Mother Cow gives life.

अमृत तो कथा है कानो से पीया जाता है ।
Nectar is Katha and is drunk through the ears.

प्रभु की पुर्ण कृपा हो जाये तब साधु संगती मिलती है ।
We are able to get the company of a Saint through God's blessing.

लक्ष्य प्राप्ती के लिये कदम उठाना चाहिये ।
Concrete steps need to be taken to reach one's goal.

जो सेवक बनेगा उसके लिये राम स्वयं सुरधेनू है ।
Ram is Surdhenu (wish fulfilling cow) for one who is willing to serve.

गुरु के बंधन में जीना परम स्वतंत्र है ।
Living under the shelter of one's Guru is supreme freedom.

मानस सत्य, धरमशाला कथा – Manas Satya, Dharamshala Katha
22nd – 30th September 2012

सत्य नियम नहीं व्रत है । नियम रखे जाते है व्रत अंदर से उभरता है ।
Truth is not a rule, it is vow; rules are kept, a vow comes from within.

सन्मान सब का करो श्रद्धा अपने में रखो ।
Give respect to all, but keep faith in your own (faith).

सबसे ब़डा पाप असत्य है ।
The biggest sin is being untrue.

सत्य स्वाभाविक हो, सत्य के लिए कोई योजना नहिं बनाइ जाए ।
The truth should be natural, for truth there should be no planning.

हमारा सत्य जब दुसरे को परेशान करे ऐसा जब आपको महेसुस हो तब चुप हो जाओ प्लि़ज, ना बोलो ।
When you feel that your truth will trouble or hurt another, then please become quiet; do not speak it.

सत्य समझने को चाहिये धैर्य ।
Patience is required to understand the Truth.

प्रतिक्षा भी एक तपस्या है ।
Waiting is also a penance.

जिसके विचार में सत्य होता है, उसके चहेरे पर आभा बहुत होती है, बोले भले ना ।
He who has truth in his thoughts will have a glow on the face, even if he does not speak.

सत्य विनम्रता से पेश हो आक्रमकता से नहीं ।
Truth should be conveyed humbly not aggressively.

सत्य समर्पण करता है त्याग करता है ।
Truth brings about surrender and sacrifice.

मानस का सत्य पंच मुखी है । एक ही सत्य पाँच रुप में मानस में प्रकट होता है ।
विचार का सत्य । उच्चार का सत्य । आचार का सत्य । स्वीकार का सत्य । सत्य का साक्षात्कार ।
Truth according to the Manas is five-headed. One Truth is presented in five forms:
Truth in thoughts, Truth in words, Truth in actions, Truth in acceptance, witnessing Truth.

मानस प्रेम, नाथद्वारा कथा – Manas Prem, Nathdwara Katha
18th – 26th August 2012

गुरु के पास जाते समय सही में जिसको गुरु को पाना है, उसको खाली हाथ ही जाना चाहिए. हाथ की मुठ्ठी में कुछ ना हो, ईन लकीरो में अपना प्रारब्ध ना हो ।
When going to the Guru, one who truly wants to attain the Guru should go empty handed. There should be nothing clenched in the hands; even the palms should be free of destiny.

उपनीषदी परंपरा में गुरु के पास जब साधक जाता तब समीध लेकर ’समीध पान’ गुरु के यज्ञ के लिए लकडियाँ लेकर जाता, यह परंपरा प्यारी है ।
In the traditions set out in the Upnishads, when a devotee goes to the Guru they would take some wood with them; they would take wood for the sacrificial fire. This is a beloved tradition.

जीवन साधना के लिए बहुत जरुरी है हनुमंत आश्रय ।
The shelter of Hanumanji is very important in the spiritual practice of life.

गुरु के द्वार से आश्रित को सही रुप में विवेक की प्राप्ति होती है ।
An aspirant can gain the true form of discrimination from their Guru's abode.

गुरु के घर से आदमी को सहि रुप में वैराग्य मिलता है ।
An individual can attain the true form of renunciation from their Guru's home.

प्रेम परमात्मा है ।
Love is God.

एक बार व्यक्ति के ह्रदय में प्रेम प्रगट हो जाए तो कुछ बाकि नहीं रहता ।
Once love appears in the heart of an individual, then there is nothing left (to be attained).

प्रेम प्रसाद से प्रगट होता है और प्रमाद से विलीन हो जाता है ।
Love appears through prasad (kripa) and it disappears due to laziness.

व्यक्ति का जीवन त्याग और प्रेम के बिना पूर्ण नहीं होता ।
One's life is not complete without renunciation and love.

३०० से ज्यादा बार मानस में प्रेम शब्द आया है मतलब १०० प्रतिशत नहीं ३०० प्रतिशत ।
The word 'Love' has appeared more than 300 times in the Ram Charit Manas, giving it not 100% but 300% approval.

प्रेम में काम और लोभ बाधक नहीं होते । प्रेम के प्रगटीकरण में क्रोध बाधा डालता है ।
Desire and greed are not barriers in the manifestation of Love; anger puts an obstruction in its appearance.

प्रामाणिक प्रेम प्रसन्नता की जनेता है ।
True love gives birth to contentment.

प्रेम किसी भी हाल में आदमी को प्रसन्न रख सकता है ।
Love has the ability to keep a person happy in any circumstance.

प्रेम हम सब में है जैसे आत्मा हम सब में है ।
Love is within each of us, just as we all have a soul.

गोस्वामीजी मानस में लिखते है राम को एक ही चीज पसंद है और वो है प्रेम ।
Goswāmiji writes in the Mānas that Rām likes only one thing and that is love.

मानस करुणा, जापान कथा – Manas Karuna, Japan Katha
5th – 13th August 2012

मैं लोगो की मनसिकता पर काम कर रहा हू ।
I am working on the mentality of people.

अध्यात्म मार्ग में दो चीजो से बचना - शिकायतों से और चतुराई से ।
On the spiritual path stay away from these two - complaints and cleverness.

भक्ति भी पूर्ण नहीं होती जब तक विश्वास द्ऱढ नहीं हो ।
Without firm faith (vishwas), devotion (bhakti) is not complete.

मैं यहाँ शबरी के मीठे बेर बोने आया हू की इसमे से मीठे फ़ल ऊगे ।
I have come here to sow the seeds of Shabri's sweet berries (a devotee from the Ramayana) so that sweet fruit will grow from this.

ब्रह्म कैसा है रहने दो । हमें तो उसका नाम लेना है और गुणगान करना है ।
Don't worry or wonder about what Brahma is like; let us just take His name and sing His glories.

विश्व और विश्वनाथ करुणा के बगैर प्रगट नहीं होता ।
The universe and the Creator manifest only through compassion.

कथा सुनो क्योकि कथा हरि स्मरण है ।
Listen to katha, as this is Hari smaran - remembering God.

कथा सुनो क्योकि कथा हरि स्मरण है ।
Listen to katha, as this is Hari smaran - remembering God.

मानस पंचवटी, जोहनसबर्ग कथा – Manas Panchvati, Johannesburg Katha
7th – 15th July 2012

सदगुरु या कोई जागृत पुरुष के बोले वचन हमारे लिए रेखाए है उनको लाधे मत ।
The spoken words of Sadguru or of a realised man are marked lines for us; we must not cross over them.

गुरु खोजो मत । तुम्हे जब जरुरत होगी वो आजाएगा ।
Don't search for Guru; when the need arises He will appear.

तुम्हारी जागृति ही तुम्हारा भजन है ।
Your awareness itself is your bhajan (prayer).

जो नहीं है छोडो, जो होगा छोडो, जो है उसे enjoy कर लो ।
Don't think about what you don't have; leave what you may have in the future; just enjoy what you do have at this present moment.

मेरी व्यास पीठ का मक्सद है की आप प्रसन्न रहो, आनंद मे रहो ।
The aim of my Vyaas Peeth is that you remain happy and are ever joyful.

पंचभूत का शरीर ही हमारा पंचवटी है ।
Our physical body made up of five elements is our Panchvati.

मानस हनुमान चालीसा (भाग ७), ताम्पा कथा – Manas Hanuman Chalisa (part 7), Tampa Katha
2nd – 10th June 2012

तबियत संभालो, पर डरो मत, भय तुम्हारी भीतरी व्यवस्था को और बिगा़ड देगा ।
Look after your health but don't be scared. Fear will spoil one's internal condition.

मेरी अपील नहीं की आप हनुमान चालीसा करे; पर आप कम से कम हनुमंत तत्व को समझे ।
My appeal to you is not to do Hanuman Chalisa; but do try to understand the essence of the Hanumant tattva.

गुरु कौन - हमें श्रद्धा दे; हमें विचार दे; प्रेम से प्रेम प्रगट करे; आश्रित के गुनाहों को कबूल कर दंड खुद भोगे; हमें अध्यात्मिक बनाये ।
Guru is the one who gives us faith; gives us thoughts / belief; who accepts our faults taking the penalty on himself; lovingly brings out the latent love in us, and makes us spiritual.

’महा’ माने जो तीन प्रकार के मकार को नष्ट कर दे : मद को मिटा दे; मदन को मिटा दे; मत्सर को मिटा दे ।
'Maha' means, one who destroys three kinds of M's: mada (ego), madan (desires), matsar (jealousy).

सुख पूर्ण दुःख झेलना तप है ।
Happily enduring all the hardships in life is Tap (Tapasaya).

पद मुक्त पदाधिकारी का नाम है हनुमानजी ।
Hanumanji is the one who holds no title / position despite being the most worthy.

मानस ईसु, यरुशलेम कथा – Manas Isu, Jerusalem Katha
1st – 9th May 2012

हरि मिलेगा अनुराग से ।
God is attained through devotion and through love.

रोज इन पांचो का दर्शन कुछ समय के लिए करो - देव दर्शन, प्रकृति दर्शन, संत दर्शन, शास्त्र दर्शन, निज ह्रदय दर्शन ।
Every day spend a few moments giving thought and time to God, to nature, your sadguru/ saint, your scripture, and finally your own self.

ईसु का पंचामृत - सादगी, नम्रता, बलिदान, प्रेम, सत्य की उद्घोषणा ।
The Panchamrut or five kinds of nectar of Jesus: simplicity, humility, sacrifice, love, and declaration of truth.

प्रत्येक संबंधो में प्रमाणिक distance जरुरी है ।
Reasonable space / distance in necessary in every relationship.

एकवीसमी सदी का त्याग करुणा से निकालना चाहिए ।
Sacrifices of the twenty-first century should be with compassion.

हर पल उत्सव है, उत्सव ही उत्सव है ।
Each moment is a celebration, filled with celebration.

आंसू इन्द्रियातीत है जैसे इश्वर इन्द्रियातीत है. आंसूओ का रिश्ता केवल ह्रदय से होता है ।
Tears are beyond the sense just as God is beyond the realm of senses. Tears have connection only with the heart.

भक्त सदा ज्ञानी ही होता है, भक्त कभी मूढ़ नहीं होता ।
A devotee is always knowledgeable, he is never dull.

મોરારી બાપુ, મુંબઈ પ્રવચન, ૮ એપ્રિલ ૨૦૧૨ – Morari Bapu, Mumbai Pravachan, 8th April 2012
Topic: જો આ હોય મારુ અંતિમ પ્રવચન, If this was my last speech

જીવન તારા હાથમા છે પણ જીવનને પર્માત્મા નુ વર્દાન માનીને રસમય અને આનંદમય જીવીલેવુ એ મારા હાથમા છે ।
Life is in Your (God's) hands, but taking life as a gift from God and living with joy and to the fullest, that is in my hands.

मानस हरिहर, राजकोट कथा – Manas Harihar, Rajkot Katha
14th – 22nd April 2012

कल जो चला गया और कल जो आएगा दोनो में काल की बात है. काल माने मृत्यु की बात है, जीने वाली बात केवल आज में है ।
That which happened yesterday and what will happen tomorrow, both are attached to time, to death. Only the present moment, today, speaks of life.

अपने पास क्षमता हो लेकिन क्षमता के साथ उदारता नहीं तो यह श्राप है ।
Capability without generosity/big-heartedness is a curse.

यह सभी को जो़डने का उपकरण, जो़डने की कथा है. यह समाज दो चीजो से जु़डता है - भोजन से और भजन से ।
Katha is an apparatus that binds everyone. It connects the Society in two ways - through provision of food and prayers.

प्रसन्न चित्त और प्रशांत चित्त हो कर कथा सुनो ।
Listen to Katha with a content and calm mind.

हनुमान जयन्ति – Hanuman Jayanti
6th April 2012

साहित्य के नवों रस एक हनुमान चलीसा में मिल जाएंगे ।
All the nine ras (flavours) of literature can be found in one Hanuman Chalisa.

मानस गोसाईं, राजापुर कथा – Manas Gosai, Rajapur Katha
24th March – 01st April 2012

तुलसी कहते है संतो का संग स्वर्ग है ।
Tulsidasji says that the company of Saints is Heaven.

निराकार या साकार यह चर्चा छो़ड दो. तुलसी का यह शास्त्र इश्वर का अक्षराकर है ।
Leave the discussion about Nirakar (God without form) or Sakar (God with form). This Shastra (scripture) of Tulsi is the syllable of God.

जो गुरु के चरण में विश्वास रखेगा, उसके विश्व के समस्त भय नष्ट हो जाते है ।
One who keeps faith at the feet of his Guru, all his fears are destroyed.

मानस के यह सात सौपान एक सीडी है. यह सीडी अपने पास रखना, आप यदि नहीं च़ढ पाओ तो ऊपर वाला निचे आने लगता है ।
The seven parts of Manas are a ladder. Keep this ladder with you, for even if you are unable to climb it, the One from above will come down.

मानस महामुनि, वर्धा कथा – Manas Mahamuni, Vardha Katha
03rd – 11th March 2012

अत्यंत सुख से ही विपत्ति का जन्म होता है ।
Extreme happiness can also give rise to adversity and misery.

जो धर्म डराए उसे मै धर्म नहीं मानता. अभय दे वो धर्म ।
Dharma or religion which instils fear, that I do not consider that to be dharma; Religion is one which gives fearlessness.

मेरा काम मंदिर बनाना नहीं, मेरा काम हर घर को मंदिर बनाना है ।
My work is not building temples instead my work is to make each home a temple.

मेरा काम मंदिर बनाना नहीं, मेरा काम हर घर को मंदिर बनाना है ।
My work is not building temples instead my work is to make each home a temple.

कुछ बाते दिखने में छोटी होती है. एक मंत्र, एक नाम छोटा सा होता है और कितना ब़डा काम कर देता है ।
There are some things that appear to be small. A Mantra, a Naam is so small and yet accomplishes such big things.

जीवन में आया हुआ दुःख हम जब प्रभु का प्रसाद समझ लेते है तब ताप मिट कर तप हो जाता है ।
Our sufferings become austerities, when we accept sorrows of life as God's prasaad, offering.

मनुष्य जीवन सब से बडा चमत्कार है ।
Human life is the biggest miracle of all.

तुलसी कहते है संत सिद्ध नहीं शुद्ध होना चाहिए; शुद्ध को गिरने की कोई संभावना नहीं होती ।
Tusli says that a saint should be shuddha (pure) and not siddha (with accomplishments). There is no possibility of the pure falling.

भय मुक्त करता है राम नाम, रोग मुक्त करता है राम नाम, विकार मुक्त करता है राम नाम ।
Rama naam frees us from fear, Ram naam frees us from disease, and lastly His name frees us from our flaws.

मानस मंगल मूरति, नागपुर कथा – Manas Mangal Murati, Nagpur Katha
11th – 19th February 2012

सुनना बहुत ब़डी भक्ति है ।
Listening is a great Bhakti itself.

प्रत्येक लाभ को शुभ नहीं समझना, लेकिन शुभ को सदेव लाभ ही समझना, चाहे छोटा हो या विरत ।
Don't take every gain to be auspicious, but all that is good and auspicious should be taken as a gain, be it small or large.

समाधि अंतिम स्थिति नहीं है. समाधि का भी कोई फल है वो है राम नाम, हरी नाम ।
Samadhi is not the final stage. Samadhi also has its own fruit and that is Ram Naam, Hari Naam.

निर्भय और निर्लोभ भाव से हनुमान चालीसा करो ।
Recite Hanuman Chalisa without any fear or greed.

राम नाम और राम काम, तुलसी का संदेश है ।
Tulsi's message is the name of Rama and the work of Rama, taking the name of God and fulfilling duty and service.

आदमी का भीतरी खालीपन केवल दो चीजो से भरा जा सकता है, प्रेम से और त्याग से ।
Love and Renunciation are the only two things that can fill the internal emptiness of man.

संघर्ष में कोई निर्णय ना ले, क्योंकी संघर्ष में हमारे चित की दशा ठीक नहीं होती ।
When in conflict don't take a decision, for during conflict we are not in the right state of mind.

जब निकट के लोग निंदा करने लगे तो समझना सत्य परम निकट है ।
When those closest to us start to condemn or denounce us, then understand that Truth is drawing close.

मानस गुरु गृह, गु़डगाँव कथा – Manas Guru Griha, Gurgaon Katha
21st – 29th January 2012

सहजता प्रसन्नता की जनेता है ।
Bliss/ happiness is born out being natural and true to one's own nature.

आज्ञा पालन के समान गुरु की कोई सेवा नहीं ।
Following Guru's instructions/ orders is the highest form of service to Him.

बिना विचार के बोले जाना वाणी का दोष है ।
Speaking without thinking is a defect of speech.

गुरु गृह की तीन मुख्य चीजे - गुरु वचन, गुरु चरण, गुरु नयन ।
The three most important things of Guru Griha: Guru's speech, Guru's feet and Guru's eyes.

सत्य का निवास स्थान है जीभ; प्रेम का निवास स्थान है इंसान का ह्रदय; करुणा का निवास स्थान है इंसान की आंखे ।
The main place for truth is the tongue, love resides in the heart, and compassion lives in one's eyes.

This Page is Under Construction. Please keep watching this space for the further updates.